Jara Soch Le Tu Man Me Syana
जरा सोचले तूं (तर्ज – जरा सामने तो आओ ) रचयिता : मुनि बुद्धमल जरा सोचले तूं मन में स्याणां, थारै जीवन रो के आधार है, झोलो बहज्या कठीनै पून रो, ईरी चंचलता रो के पार है ।। १. झूठी है काया झूठी है माया, झूठो है जीवन रो खेलो झूठा है परिजन झूठा है […]