Varshitap Geet,
(लयः- देख तेरे संसार की) वर्षीतप धाराहै इन्होंने, बहिना (भाई )है पुण्यवान। इनके खूब करो गुणगान ॥ रहे समाधि और सुखसाता, यही करे अरमान। इनके खूब करो गुणगान ॥ 1. बहुत कठिन है, तप का करना, बहुत कठिन है धीरज रखना, बहुत कठिन है लक्ष्य को वरना बहुत कठिन है इस पथ पर चलना, हममें […]