Tapasya (तपस्या)

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagy

Mati Ri Aa Kaya Aakhir Mati Me Mil Jyav Hai

माटी री आ काया थारी, माटी में मिल जावली। क्यांरो गर्व करे रे मनवा, क्यां पर तूं इतरावे है। आ सांसों रो विश्वास नहीं, कद आती जाती रूक जावे। जीवन में झुकनो नही जाने, (पण जम रे आगे झुक जावे। २) एक कदम तो उठ गयो, दूजो कूंन जाने उठ पावेलो। क्यांरो गर्व… इन तन […]

Jain Bhajan, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Chetan Lele Sharna Char

चेतन ले लै शरना चार, सांचों आरो ही आधार, सारो स्वार्थियो संसार,कोई थारो नही है। 1.श्री अरिहंत सिद्ध अणगार,सांचों धर्म हिय में धार ओ ही करंसी बेड़ा पार,और चारों नहीं है,। 2.जो तू होणो चावे न्याल,आं च्यारा रो पल्लों झाल थारे माथे उभो काल,कोई पतियारो नहीं है  3.जिला होकर रही सचेत,आं च्यारा स् यु राखी

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagy

Jyaro, jinaro Lagyo Hari Su Het,

ज्यारो लाग्यो ज्यारो लाग्यो हरी सु हेत ज्यारो लाग्यो हरि सू हेत, ज्यारो लाग्यो प्रभु से हेत ,करमा रो संघाती राणा कोई रे नहीं , 1.एक मायड रा दोय बालका जी, दोय बालका जी,जिणरा न्यारा, न्यारा भाग ,जिणरा अलगा अलगा भाग करमा रो संघाती राणा कोई रेनही,एकचढ़े है, घोड़ा(हस्ती)पालकीजी-2 दूजो गाया रो ग्वाल -2करमा रो

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagy

Mane Abke Bacha Le Mhari May

म्हाने अबके बचाले म्हारी माय म्हाने अबके बचाले म्हारी माय बटाऊ आयो लेवण ने, औम्हाने—–  ① आठ कोठडी नव दरवाजा इण मन्दिर रे माय, लुकती छिपती मै फिरु-2 लुकती न छोड़े वेरी नाही ,बटाऊ आयो लेवण ने —- ② हाथ जोड़ कन्या कह  रे सुणो मायड म्हारी बात -2—. अबकी बटाऊ ने पाच्छो करें दे-2

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Mat Kar Maya Ko Ahnkar, Mat Kar Kaya Ko

मत कर माया को अहंकार ,मत कर कायाको अभिमान ,काया थारी गार से काची -2,हो काया थारी गार से काची,जैसे ओस रा मोती   झौंका पवन का लग जाय, झपका पवन का लग जाय,काया  धूल हो जासी, हो काया थारी धूल हो जासी  1.ऐसासख्त एक महाराज,जिसका मुल्कों पे राज,जिन घर झूलता हाथी,जिन घर झूलता हाथी, हो

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Jivan To Bhaiya Ek Rail Hai

जीवन तो भैया एक रेल है कभी पेसेन्जर कभी मेल है -2 1.सुख -दुख की पटरी पर दौड़ लगाती है आगे मंजिल पर बढ़ती जाती है,हो हो हो सुख -दुख —- सांसों का जब तक इसमें तेल है, कभी पेसेन्जर– 2.रिश्ते भी बनते और बिगड़ते हैं,यात्री जो चढ़ते और बिछड़ते हैं ,हो हो रिश्ते भी

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagy

Bhai Mhara Rang Su To Rang Mil Jaay

भाई म्हारा रंग स्सु तो रंग मिल जाय ,गुणा री जोड़ी नाय मिल  1.कागो कोयल एक ही रंग रा एक ही दाणो खाय  कागो तो कडवो बोले रे कोयल रस बरसाय, गुणा री जोड़ी नाय मिल  2.हल्दी केसर एक ही रंग रा एक ही हाट बिकाय , हल्दी तो सागा म सीज, केसर तिलक लगाय

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Kaya Thari Nagari Me Bole Jhako Kun Hai

काया थारी नगरी में बोल जको कुण है, बोल जको कुण है ओ सुण जको कुण है -2 1.तुम ही तो तालो रामा ,तुम ही तो  चाबी-2 ताला म चाबी लगावे जको कुण है लगावे जको कुण है ओ खोल जो कुण है, काया थारी नगरी में बोल जको कुण है  2.तुम ही तो सुतों

Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

“Aayo Jyu Hi Jasi

आयो ज्यू ही जासी आयो ज्यू ही जासी, ओ अवसर कद ,कद पासी रे , बोल मीठों बोल बेसी जीणो है नहीं, अरे बोल मीठों बोल बेसी जीतो है नही 1.चौरासी भटक्यो जद भोला मिनख जमारो पायो है झूठ जग री झुठी माया मूरख क्यु भरमायो है अरे भलों किया सु भलों हुवेला,बुरों किया पछतासी

Guru Bhakti Bhajan

Mere Man Me Samaye Gururaj Re

(लय- मेरा नाम है चमेली) मेरे मन मे समाये गुरु राज रे, मेरे तन में समा ये गुरु राज रे, रोम रोम में समाये गुरु राज रे, मेरी सांसों में समा ये गुरु राज रे, जैसे तारों में है चन्दा, जैसे नदी तो में गंगा,लहर लहर में समाये गुरु राज रे —- जैसे फूलों में

Scroll to Top