Tapsya RI Mahima Bhari
(लय- खिण – खिण ए बीत्या) तपस्या री महिमा भारी, तपस्या है मंगलकारी, तपस्या जीवन रो सिणगार है। हो भाया! तपस्या स्यूं होवे नैया पार है ॥ स्थायी ।। तप है गंगा तप है जमना, तप है तीरथ धाम जी , तप रा जठे नगारा बाजे, सरे अचिंत्या काम जी, आत्मिक शांति रो पथ है, […]