Tapsya

Bhachya, Tapsya

Sashan Mata Ko Parno 2(Bhanchya)

शासन माता पारणो-2 झालर रो झणको, कांसी रो ठणको म्हैं सुण्यो, आ तो शहर सतरंजै रै मांय, के झालर बाजै जी। सतरंजै में आदिनाथ जनमिया, ए तो माता मोरां देवी रा नन्दजी, झालर बाजै जी। झालर रो झणको, कांसी रो ठणको म्हें सुण्यो, आ तो शहर गिरनारां रै मांय, के झालर बाजै जी। गिरनारां में […]

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Badhao-3(Bhanchya)

बधावो-३ पांच बधावा म्हारै उमट आया। आया ओ ज्ञान, दर्शन चारित्र निर्मलाजी, पहले बधावै म्हानै ज्ञान सुवावै, सुवावै ओ ज्ञानी साधां री सेवा म्हे करांजी ।।१।। दूजै बधावै म्हानै तप सुवावै, सुवावे ओ तपसी साधां री सेवा म्हे करांजी ।।२।। अगणे बधावै म्हानै खीम्या सुवावै, सुवावै ओ खीम्या साधाँरी सेवा म्हे करांजी।।३।। चौथे बधावै म्हानै

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Malan & Mishri(Bhanchya)

मालण म्हें थांनै मालण बरजीयो इण बिध मरवो मत बाय,  इण बिध साध पधार गोचरी, श्रावक जोवे बांरी बाट ग्यारवां श्रेयांस बांधस्या, बाहरवां वासूपूज्य देव तेहरवां बिमलनाथ बांधस्यां, चवदवां अनन्तनाथ देव। हरीयो सो पूठौ बांर हाथ मं, बांचनी सुतर बखाण,  ऊंचे सिंहासन म्हाराजसा रो बैठणो, नीचे पुरखत्यां रो ठाठ। भायां तो वाणी आपरी झेलसी, बायां

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Satrangi Jajam Dhalo Ji Koi Aaj Mhare Aangane(Bhanchya) (badhao)1

सतरंगी जाजम सतरंगी जाजम ढाळो जी कोई, आज म्हारे आंगणे। नवरंगी जाजम ढाळो जी कोई, आज म्हारे आंगणे । ध्रुव ।। सुसरोजी नै बेग बुलावो जी काई, आज म्हारे आंगणै। थांरी कुल बहू करी अठाई जी कोई, आज म्हारे आंगणै। अठाई रा हरख करावो जी कोई, आज म्हारे आंगणै।  ,  अठाई रा जीमणकरावो जी कोई

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May Mati Chikni Ji , (Bhachya, Tapsya Geet)

माया माटी चीकणी मांय माटी चिकणीजी, फागण कलश बंधायक चित्त चितारियाजी।  गाई जै।     ऋषभनाथ     गाई जैजी माता, मोरां देजी रा नन्दक कलश बंधाईया जी  कलशां के सोने का, डांडे के रूपैरा पड़गना जी।  इसड़ा सा कुंभ कलश म्हारी तपस्या में चाहिजे जी  इसड़ा सा रतन कलश म्हारी अठायां में चाहिजे जी ||१|| मांय

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Sashan Mata, (bhachya)

शासन-माता (झिर-मिर) झिरमिर-झिरमिर मेवज बरसे ओ, परनाल्यां पाणी पडैजी।  उत्तर-दिखण स्यूं ओ मुनिसर आया ओ, आय उतरिया हरियै बड़ तलै जी।।  बुजत बुजत नगर डंडोल्यो ओ, शासन देवत माता रो घर किस्यो जी। ऊची सी मेड़ी ओ अजब झरोखा ओ, केल झबरको माता रे बारणै जी।।  अब म्हारा सासुजी ओ साधां रे पधार्या ओ, मुनिसर

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Dhanya Gaj Sukumal Muni Dhyan Dhare

धन्य गजसुकुमाल   (लय: सरवर पाणीड़ै ने जाऊं)।   रचयिता : आचार्यश्री तुलसी  धन्य गजसुकुमाल मुनि ध्यान धरै,  ऊभा अटल श्मशान गुण-ज्ञान भरै।  ज्ञान भरै अघ शान हरै ।। १. जिण ही दिन दीक्षा लीन्ही जिनवर नेमी पास,  उण ही दिन कीन्हों दारुण-साधना-अभ्यास ।  पडिमा बारवीं भिखू की अंगीकार करें ।। २. जीवित ही कीन्हो अपण अंग

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Nabhi Raja Mora Devi Rani

चौवीसी नाभिराजा मरुदेवी रानी जिन ,माता  जाया  पहला ऋषभ नाथ स्वामी ।  जितशत्रु राजा विजयादेवी राणी ,जिन माता  जाया अजित नाथ स्वामी । जितारथ राज सेनादेवी रानी जिण माता जाया तीजा संभवनाथ स्वामी । संवर राजा सिद्धार्थ रानी जिण माता जाया चौथा अभिनन्दन स्वामी । मेघरथ राजा मंगलादेवी रानी ,जिण माता जै पांचवा सुमतिनाथ स्वामी

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Moti (Nemisar Gignnara Ra Vasi

मोती नेमीश्वर गीगनारा रा वासी तो, मोती दयो महाराणी जी।  कोरी कोरी कुल्हड़ी में दही रे जमादयूं तो,  गोडे बैठ जीमादयूजी’ ।  कांई रे करूं थारै कुल्हड़ी रो दही तो, गोडे परतन वैठाजी ।  बागो तो केसरीया सियां दयूं तो, टोपी लाल गुलाबीजी।  काई रे करूं थांरो केसरीया बागो तो, टोपी परतन ओढाजी ।  हाथ

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Sone Ro Suraj Ugiyo( Bhanchya,badhao)

सोने रो सूरज उगियों सोने से सूरज उगियों, म्हारो खिल रह्यो भाग सोभाग रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे । ॥ ध्रुव ।। झुमरमल सा रा लाडला, माता नेमा जी रा अंगजात रे, बधावो गावो, तपस्या हुई है म्हारे आँगणे ।।  कविकुल कमल दिवा करो, ए तो जिण न शासन रा नाथ रे,

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