Terapanth

Jain Bhajan, Paryushan, Terapanth

Kshamayachana Geet (Saptlaskh Je Jati Prithwi) पर्युषण

क्षमा याचना गीत श्रीमज्जयाचारय‌ सप्त लक्ष जे जाती पृथ्वी श्री सप्त लक्ष अपकाय, इत्यादिक चउरासी लाख जे जीवायोनि खमाय ।  सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।१।। गण में सन्त सती गुणवन्ता, सगला भणी खमाय ।  निज आतम प्रति नरम करी नै, मच्छर भाव मिटाय ।। सुगुणा ! खमावियै तज खार ।।२।। किणहिक सन्त सती सूं […]

Bhikshu Swami, Terapanth

अ भी रा शि को उदारी हो (विघ्न हरण की ढाल)Abhi Ra Shi Ko Udari Ho (Vighn Haram Ki Dhal)

 धम्म-जागरणा विघ्न-हरण  श्रीमज्जयाचार्य अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो, धर्ममूर्ति धुन धारी हो, विघ्नहरण वृद्धिकारी हो, सुख संपति दातारी हो । भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। १. भिक्षु भारीमाल ऋषिरायजी, खेतसीजी सुखकारी हो, हेम हजारी आदि दे, सकल संत सुविचारी हो । प्रणमूं हर्ष अपारी हो ।। २. दीपगणी दीपक जिसा, जयजश करण उदारी हो,  धर्म-प्रभावक

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Pratkalin ,saykalin Vandana

प्रातः क़ालीन वंदना  जीवन-धन तुम जीवन-दाता,  कलाकार जीवन-र्निमाता।  श्रमण संस्कृति के उद्‌गाता, करणानात के हो तुम आबाला करूण तपस्वी, बीर्थ मरुस्थी,  ओजस्वी प्रभु परम यशस्वी, दिनमणि के अतिशय सेकस्यी  विघ्न विनायक मंगल दायक, शांति विधायक जग उन्नायक  युग-युग जीओ शासन नायक विश्व शांति के तुम संगायक  (तर्ज चौपाई) सायंकालीन वंदना युग प्रणेता, युग प्रचेता, युग

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Shasan Ye Sabse Bada

शासन से सबसे बड़ा दुनिया का सरताज है  प्राणों से प्यारा रा गण है हमारा इसपर हमें नाज है। बनकर हिमालय देता है पहरा नदिया उफनती तो ने बांध है। शोख छटाओं में गम की घटाओं में सम का पढ़ायें वो पाठ यही है  तिरछी हवाओं मे बहकी फिजाओं में पार जो उतारे वो घ

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Har Manas Harsh Vibhor

(तर्ज -नखरालो देवरियो) हर मानस हर्ष  विभोर ,मंगल दीप जल्या ।  आ उजली आई भोर खुशी रा सुमन खिल्या न  वन सो प्यारो भैसव सासण है आपारो  नई-नवेली रचना  लागे  जग में तेज सितारों  गुरु र हाथा में डोर… एक-2 स्स्यू हुया दीपता आपा रा गणमाली।  मिल्यो सुखद नेतृत्व संघ न ओ गण गौरवशाली  प्रीति

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Vighan Haran Ki Dhal

विघ्न हरण की ढाल अ.भी.रा.शि.को. उदारी हो, धर्ममूर्ति धनु धारी हो, विघ्नहरण वृद्धिकारी हो, सुख संपति दातारी हो ।  भजो मुनि गुणां रा भंडारी हो ।। 1. भिक्षु भारीमाल ऋषिरायजी, खेतसीजी सुखकारी हो, हेम हजारी आदि दे, सकल संत सुविचारी हो । प्रणमूं हर्ष अपारी हो ।। 2. दीपगणी दीपक जिसा, जयजश करण उदारी हो,

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Arhat Vandana(Bhavbhini Vandana)

वन्दना – सूत्र मोक्ष-सूत्र अर्हत् वन्दना १. णमो अरहंताणं णमो सिद्धाणं णमो आयरियाणं णमो उवज्झायाणं णमो लोए सव्वसाहूणं एसो पंच णमुक्कारो, सव्व पावपणासणो। मंगलाणं च सव्वेसिं, पढमं हवइ मंगलं ॥ २. जे य बुद्धा अइक्कंता, जे य बुद्धा अणागया। संती तेसिं पइट्ठाणं, भूयाणं जगई जहा ॥ ३. से सुयं चमे, अज्झत्थियं च मे, बंध-पमोक्खो तुज्झअज्झत्थेव

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Vandana Ananad Pulkit (Parmeshthi Vandana)

परमेष्ठी वन्दना वन्दना आनन्द-पुलकित, विनयनत हो मैं करूं ।  एक लय हो एक रस हो, भाव तन्मयता वरूं ॥ णमो अरहंताणं सहज निज आलोक से भाषित स्वयं सम्बुद्ध हैं,  धर्म, तीर्थंकर शुभंकर वीतरागविशुद्ध हैं।  गति-प्रतिष्ठा त्राणदाता, आवरण से मुक्त हैं,  देव अर्हन् दिव्य योगज अतिशयों से युक्त हैं ॥१ ॥ णमो सिद्धाणं बन्धनों की श्रृंखला

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Ye Terapanth Hamara

(लय : ईन्सान से ईन्सान को हो) सो सो वरसो से दे रहा जग को उजियारा  ये तेरापंथ हमारा ,यह तेरापंथ हमारा -2 हम भाग्यवंत है यह पंथ हमे प्राणों से प्यारा यह तेरापंथ हमारा यह तेरापंथ हमारा – 2 भिक्षु की गरिमामयी वाणी बोल रही घर घर में वीणा की झंकार सी रस घोल

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Shasan Kalptaru

शासन कल्प तरु… (लय : भलकै भानुड़ै सो भाल) शासन कल्प तरु… उतर्यो मोहरां रो चरु। राखो-राखो हो रखवाली। बाबै भिक्षु रो उपगार, माना जीवन भर आभार। ज्यांरी सांवरी सूरत, तेरापंथ रो आधार ॥ अलबेलो शासन आपारों, सारां रै मन भावणो। मनहारो प्राणां स्युं प्यारो – लागै घणो सुहावणो। इण री ऊजली आभा स्युं –

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