Deshbhakti

Sare Jaha Se Achha Hindosta Hamara

सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा -2 हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्तां हमारा सारे जहां से अच्छा, हिन्दोस्तां हमारा -2 परबत वो सबसे ऊँचा, हमसाया आसमां का  वो संतरी हमारा, वो पासबां हमारा गोदी में खेलती हैं, जिसकी हज़ारों नदियाँ  गुलशन है जिसके दम से, रश्क-ए-जिनां हमारा मज़हब नहीं सिखाता, आपस में बैर रखना […]

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Dil Diya Hai Jan Bhi Denge A Vatan Tere Liye

मेरा दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए कर्मा तू, मेरा धर्मा तू तेरा सब कुछ मैं, मेरा सब कुछ तू हर करम अपना करेंगे ऐ वतन तेरे लिए  दिल दिया है जां भी देंगे ऐ वतन तेरे लिए हर करम अपना करेंगे,  तू मेरा कर्मा, तू मेरा धर्मा तू मेरा अभिमान

Jain Mantra

Dipawali Poojan Jain Vidhi Se

दीपावली पर्व पूजा (जैन विधी से) “आवश्यक-सामग्री” अक्षत (चावल) कुंकुम, मोली, गुड़, जल-कलश, अगरबत्ती, पटृ, सिक्के, लाल वस्त्र, घृत का दीपक, थाल एवं मंगल-भावना यंत्र आदि। विधिः सर्व प्रथम पूर्वाभिमुख होकर “मंगल भावना-यंत्र को उचित स्थान पर स्थापित करें। थाल के मध्य में कुंकुम से अर्हम लिखें। पट्ट पर लाल-वस्त्र बिछाकर चावल से बनाएं। सर्व-मंगल-मांगल्यं,

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Bhikshu Ashtkam (Aachary Mahapragya Ji)

भिक्षु अष्टकम् (आचार्य महाप्रज्ञ) १. अकम्पः संकल्पः क्वचिदपि न केनापि चलितः,  न चित्ते चांचल्यं न च विपथगामीन्द्रियगणः।  समं सोढा गालिः क्वचन घनमुष्टेः प्रहरणं,  प्रसन्ना त्मा भिक्षुर्नयनमवतारं नयतु मे ॥ तेरापंथ के आद्यप्रणेता आचार्य भिक्षु दृढ संकल्प के धनी थे। कोई भी व्यक्ति उनके संकल्प को किसी भी परिस्थिति में प्रकम्पित नहीं कर सका। उनके चित्त

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Tulsi Ashtkam (Aachary Tulsi)

तुलसी अष्टकम् (आचार्य महाप्रज्ञ) १. सदानंदस्पंदः प्रवहति मनोहारिवदने,  प्रशस्तं वात्सल्यं स्फुरति सुखदं नेत्रयुगले ।  विकासे विन्यस्ता विमलविपुला दृष्टिरनिशं,  जगद् वंद्म: स्वामी विशदचरितो नाम तुलसी ॥  जिनके मनोहारी मुख पर सदा आनन्द का स्पन्दन प्रवाहित रहता था, जिनके दोनों नेत्रों में सुखद और प्रशस्त वात्सल्य स्फुरित होता था, जिनकी विमल और विशाल दृष्टि निरंतर विकास कार्यों

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Mahapragya Ashtkam

महाप्रज्ञ-अष्टकम् (युवाचार्य महाश्रमण) १. पुनीतान्तः प्रज्ञा गहनतम तत्त्वेषु निपुणा, श्रुतस्वाध्यायेन सुविदितरहस्यो विभुवरः । प्रशस्या शास्त्राणां सुषमतर-सम्पादन-सृतिः,  महाप्रज्ञः पूज्यो जिनपतिसरूपो गुरुवरः ॥ आपकी पुनीत अन्तःप्रज्ञा गहनतम तत्त्वों को जानने में निपुण है। आपने आगमों के स्वाध्याय से उनके रहस्यों को भलीभांति आत्मसात् कर लिया है। आपके द्वारा विहित आगमों के सुसम्पादन का कार्य प्रशस्य है- श्लाघ्य

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Roj Pratidin Niyam Le. (Roj Ki Kamayi)

आँखें बन्द करके एक अंगुली उपरोक्त खानों पर रखें। आँख खोलने पर अंगुली जिस नम्बर पर हो, उस दिन उस नम्बर का त्याग करें। असुविधा हो तो एक चाँस और ले लें। रोज की कमाई नियम तालिकाः १. नमस्कार महामंत्र की एक माला फेरना। २. रात्रि भोजन का त्याग करना। ३. ॐ भिक्षु की तेरह

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Mahavir Ashtkam,( Aachary Mahapragya)

महावीर अष्टकम् (आचार्य महाप्रज) १. अनेकान्तः कान्तः सकलसरितां संगम इव,  प्रवादे स्याद्वादः सकलवचसामुद् गम इव ।  न सत्यं सत्यांशैर्वियुतमिह दृष्टं बुधजनैः,  महावीरो धीरः स्फुरतु मम चित्ते प्रतिपलम् ॥ भगवान ने सत्य की उपलब्धि के लिए अभिलषणीय ‘अनेकांत’ का दर्शन दिया, जो समस्त विचारों की सरिताओं के संगमस्थल की तरह है। अनेकांत की अभिव्यक्ति के लिए

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Mahavir Ashtkam

महावीर अष्टकम् यदीये चैतन्ये मुकुर इव भावाश्चिदचितः,  समं भान्ति ध्रौव्य व्यय-जनि-लसतोऽन्तरहिताः  जगत्-साक्षी मारग प्रकटनपरो भानुरिव यो,  महावीरस्वामी नमन पथ-गामी भवतु मे ॥ २. अताम्र यच्चक्षुः कमलयुगलं स्पन्दरहितं,  जनान् कोपापायं प्रकटयति वाऽऽभ्यन्तरमपि ।  स्फुटं मूर्ति यस्य प्रशमितमयी वातिविमला,  महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी भवतु मे ॥ ३. नमन्नाकेन्द्राली-मुकुट-मणिभा-जालजटिलं, लसत्पादाम्भोजद्वयमिह यदीयं तनुभृताम् । भवज्वालाशान्त्यै प्रभवति जलं वा स्मृतमपि, महावीरस्वामी नयन-पथ-गामी

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Anashan, Santhara Lene Ki Vidhi(संथारा)

अनशन (संथारा) अनशन की पूर्व भूमिका को संलेखना  कहते हैं। संलेखना से आत्मा को शुद्ध कर ने के पश्त्चात  शारीरिक क्षमता व मनोबल देखकर संथारा (अनशन) किया जाता है। संथारा दो प्रकार का होता हैं:- १. सागारी संथारा (थोड़े काल के लिए) २. यावज्जीवन संथारा (पूर्ण जीवन के लिए) सागारी संथारा जब कोई अचानक संकट

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