Gahre Tal Me Moti Milasi
गहरे तल में मोती मिलसी तर्ज – चांद सी महबूबा…. (रचयिता : साध्वी अणिमाश्री) माटी रै ईं तन पर चेतन ! क्यूं इतो इतरावै है । दो दिन री ई चमक-दमक परे गाफिल ! तू भरमावै है ।। धीरे-धीरे चाल रह्यो क्यूं, तेजी स्यूं अब कदम उठा । असली घर में जाणै खातिर, मोह-माया ने […]