E Tan Ro Pal Ro Bharos Nahi
ई तन रो ! तर्ज : दिल करता…. रचयिता : मुनि मधुकर ई तन रो, पल रो भरोसो नहीं, ई तन रो, क्यूं इत्तो इतरावै, क्यूं दुष्कर्म कमावै, कद दिवलो बुझ ज्यावै ।। दिन-रात एक धुन, भाग्यो-भाग्यो फिरै है, ऊड़े है आकाश नदी, सागरां नै तिरै है, हो…. पईसै रे खातर धरम गमावै ।। १ […]