Adhyatmik, Mangal Bhavna

Sabka Mangal Hoy Re

सबका मंगल होय रे तेरा मंगल, मेरा मंगल सबका मंगल होय रे सबका  मंगल सबका मंगल सबका मंगल होयरे  जिस जननी ने जन्म दिया है उसका मंगल होयरे  जिस गुरु ने ज्ञान दिया है उसका मंगल होयरे   जिस पिताने पाला पोसा उसका मंगल होय रे  इस जगत के सब दुखियारे प्राणी का मंगल होय रे  […]

Krishna Ji, Shyam

Bata Mere Yar Sudama Re Bhai Ghana Dina Te Aaya

बता मेरे यार सुदामा रे भाई घणा दिना ते आया बालक था रे जब आया करता, रोज खेल के जाया करता हुई कै तकरार सुदामा रै, भाई घणे दिना में आया मन्ने सुना दे कुटुंब कहानी, क्यों कर पड़ गयी ठोकर खानी टोटे की मार सुदामा रै, भाई घणे दिना में आया सब बच्चो का

Paras

Pranmami Sada Prabhu Parshv Jinam

प्रणमामि सदाप्रभु पार्श्वजिनं,  जिननायक दायक सौख्य धनम्। धनचारू मनोहर देहधरं,  धरणिपति नित्य सुसेवकरम्  करुणा रस रजिंत भव्यफणि, फणसप्त सुशोभित मौलिमणि मणिकांचन रूप त्रिघोर घटं, घटितासुर किन्नर पाश्र्वतटम्। – तटिनि पति धोष गंभीर स्वरं  शरणागत विश्व अशेषनरम्  नरनारी नमस्कृत नित्य मुदा,  पद्‌मावती गावती गीत सदा  सतत्तेन्द्रिय गोप यथा कमठं, कमठा सुरवारणमुक्तहठं हठहेलित कर्म कृतान्तबलं,  बल-धाम दलंदल

Deeksha

Diksha Ki Bela Aayi

(तर्ज-मायरे की बेला) दीक्षा की बेला आई, देते हम तुमको विदाई,  गृहस्थ जीवन को जा रही छोड़ के  देखो ढोल नगाड़ा बाजे द्वार है हो बहना जन्मों तक तेरा उपकार है  (नाम)बाबुल का आंगन  छोड़ा, माता का आंचल छोड़ा बहन भाई को छोड़ा, साथी बचपन के छोडे  आजादी तुमने पायी, जिनवर से प्रीत लगाई  जन्मों

Krishna Ji, Shyam

Aaye Hai Din Faugun Ke

।। श्री श्याम वन्दना ।। (तर्ज-कन्हैया घर आजा रे…) आये है दिन फागण के, आये है दिन नाचण के,  आज नहीं तो कद नाचोगे, बीत गये दिन सावण के ।। यहीं वो दिन घर घर कीर्त्तन होता,  बाबा से जाके मिलणे का मन होता ।  आये है दिन खाटू जाकर, गीत श्याम के गावण के

Guru, Swagat Geet

Gangajal Sam Pavan Ujjawal Jyot

गुरुवर का शुभ आगमन मंगल मय दिन आज ।  मंडल की वर्धापना, स्वीकारो गुरुराज ॥ (लावणी) लय- पनिहारी गंगाजल सम् पावन उज्जवल ज्योत जी  ओ करे जन-2रो उद्धार  आया दिल्ली र द्वार  कल्पतरू उतयोरे है म्हारे आंगणे  देखो मोरा रो चरू उतरंयो दिल्ली शहर में -2 ( श्रीचरणा म वन्दना, पूछ रहया  सुखसात -2 धन्य

Bhikshu Swami

Man Se Pukaru

मन से पुकारूं भिक्षु… (लय-तुम्हीं मेरे मंदिर…) मन से पुकारूं, वचन से पुकारूं, कहां पे मिलोगे (भिक्षु), कहां पे मिलोगे। दिन में न भूलूं, रात में न भूलूं,  सुधि कब लोगे (भिक्षु), सुधि कब लोगे ।। आं।। ढूंढ़ रही हूं तेरी, कब से नगरिया।  तुमसे मिलूं मैं कैसे, बता दो डगरिया।  सुनो टेर मेरी, कर

Guru, Mahashraman

Man Madhuvan Me Aayi Malay Bahar Hai (Mahashraman)

आई मलय बयार है (लय-खड़ी नीम के नीचे …) मन मधुवन में आई मलय बयार है ।  फूल-फूल, पत्ते-पत्ते में सौरभ आज अपार है ।। आं ।। तेरा-पथ के निर्मल नभ में नये दिवाकर महाश्रमण । पूर्वाचार्यों की प्रभुता-विभुता के ठाकर महाश्रमण ।  धरती से अंबर तक जय-जयकार है ।।१।। नई उमंगें नई तरंगें नये

Tulsi

Kartik Dwitiya Ka Chand Guru Tulsi(s)

कार्तिक द्वितीया का चाँद गुरु तुलसी ।  चाँद की कलाओं का विस्तार गुरु तुलसी ।। जन्म वदना की गोद में प्रकाश दिव्यआ गया  लाडनूं के लाल ने जगत झिलमिला दिया-2  अनूठी आभा से सरोबार गुरु तुलसी  बीसवीं सदी का उपहार, गुरु तुलसी-2 संचित पुण्याइया उदय में जो आ गई  कांति वान मूरत कालू की मन

Mahapragya

O Dashame Divya Diwakar(S)

रोशनी पाके गुरुवर से ज्ञान  सूरज उगाया था  गुरु में तुम, तुम्हारे में गुरुका दिल समाया था  घोर कलिकाल में उंचाइया देदी समर्पण को  बने महाप्रज्ञ नथमल से स्वयं गुरु  ने   बनाया था… ओ दशमे दिव्य दिवाकर गुरु महाप्रज्ञ रत्नाकर ओहोहो कैसी भक्ति दिखाई, दिव्य शक्ति है पाई दियातेज संघ को समर्पण बोलता है, मधुर

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