Author name: Sunita Dugar

Tapasya

Sangh Maduwan Me Aaya MadhuMas

(लय – आलौट केआजा ) संघ उपवन में आया मधुमास करें तपस्या का अभिनन्दन  तप गीतों से गाये गुणगान  करे तपस्या का अभिनन्दन महाश्रमण गुरू की करुणा नजर से पावस  अनूठा पाया मीठा उपदेश देकर घर घर मे जाकर सतिवर ने हमको जगाया हुआ घट घट  में उजला प्रकाश तपस्या से कटते जनमो के फेरे […]

Bhikshu Swami, Guru

Dena Hai To Dijiye Janm Janm Ka Sath

देना है तो दीजिये जन्म 2 का साथ  मेरे सिर पर रखदो गुरु वर अपने ही दोनो  हाथ झुलस रहे हैं गमकी धूप में प्यार की छैंया करदे तू  बिन पानी के नाव चलेना । अब पतवार पकडले तू  मेरा रस्ता रोशन करदे छाई अंधियारी रात इस जनम में सेवा देकर  बहुत बड़ा अहसान किया 

Hanuman Ji, Ram

A Malik Tere Bande Hum

ईश वन्दना ए मालिक तेरे बन्दे हम, ऐसे हो हमारे करम। नेकी पर चले और बदी से टलें, ताकि हँसते हुए निकले दम। ये अँधेरा घना छा रहा, तेरा इंसान घबरा रहा। हो रहा बेखबर, कुछ न आता नजर, सुख का सूरज छिपा जा रहा। है तेरी रोशनी में जो दम, तो अमावस को करदे

Krishna Ji, Shyam

Itni Shakti Hame Dena Data

ईश वन्दना इतनी शक्ति हमें देना दाता, मन का विश्वास कमजोर हो ना हम चलें नेक रस्ते पे हमसे, भूलकर भी कोइ भूल हो ना -2 दूर अज्ञान के हो अंधेरे, तू हमें ज्ञान की रोशनीं दे हर बुराई से बचते रहें हम, जितनी भी दे, भली जिन्दगी दे बैर हो ना किसी का किसी

Hanuman Ji, Ram

Tum Hi Ho Mata Pita Tumhi Ho

प्रार्थना तुम्ही हो माता पिता तुम्ही हो। तुम्ही हो बन्धु सखा तुम्ही हो। तुम्ही हो साथी तुम्ही सहारे। कोई न अपना सिवा तुम्हारे। तुम्ही हो नैया तुम्ही खेवैया। तुम्ही हो बन्धु सखा तुम्ही हो। जो खिल सके हैं वो फूल हम हैं। तुम्हारे चरणों की धूल हम हैं। दया की दृष्टि सदा ही रखना। तुम्ही

Mahavir Swami

Aao Prabhu Mohe Darshan Do

( लय- बारबार तोहे  क्या समझाऊं) आओ प्रभु मोहे दर्शन दो, मै कब से करु पुकार  तुम बिन प्रभुजी कौन करे कर भवपार  हाथ जोड़ में अर्ज करूं सुन जग के पालन हार  (तुम बिन प्रभुजी कौन करे भव पार ) लख चोरासी फिर कर आयो पास तेरे  जन्म मरण दुख मेटो दीनानाथ मेरे  छल

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Aaya Hai

पर्युषण पर्व आया है, अनोखा रंग, छायाा है   आत्म चिंतन    आत्म उत्थान  का संदेश लाया है। ① सु सौरस फैली है तप की ये देखोआज कण कण में दैष को धो दिया मनसे  समता स्रोत बहाया है ② ये पावन पर्व आया हूँ लेकर इक नया सन्देश  जगाले आत्म शक्ति को मिटाले क्षीणता मन

Shiv Ji

Damru Wale Ki Mahima Hai Nyari

।। श्री शंकर वन्दना ।। (तर्ज-मणिहारी का भेष बनाया…) डमरू वाले की लीला है न्यारी,  इसे कहते है भोला भण्डारी ।। टेर ।। करके योगी को भेष, रहता हरदम महेश,  ये तो नन्दी की करता है सवारी ।।१।। ऊँचे पर्वत शिखर, भोले बाबा का घर,  संग रहती हिमाचल दुलारी ।।२ ।। लागी कैसी लगन, राम

Jain Bhajan

Pyaro Pyaro Lage Navkar

प्यारो प्यारो लागेनवकार हिवड़े में म्हारे बसग्यो म्हारे बसग्यो, म्हारे बसग्यो  मंत्र घणो उपकारी ओ है गुण रो एक खजा‌नो हो-2  दोरी बेला  आडो आवे पांच पदा रो शरणो हो  चोखो चोखो लागे नवकार  हिवड़ में म्हारे बसग्यो  मन पंछी न काबू   राखण समता दोष लेखेरे आहामत्र री माला सुख वालोतो तिरज्याचे अलिो. भालो नागिनवकार

Jain Bhajan

BhavSagar Par Lagata Hai Mahamantra Navkar Jain

महामंत्र नवकार (लय- कैसी वह कोमल काया रे)  भव सागर पार लगाता  है, महामंत्र नवकार । बिगड़े सब काम बनाता है महामंत्र  नवकार ।।  हर पल यह मंगल करता सारी दुविधायें हरता  भय मन से दूर भगाता है,  महामंत्र नवकार  यह मंत्र बड़ा उपकारी, पूरी हो इच्छा सारी ।  यह सोये भाग्य जगाता है। महामंत्र

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