Shudh Man Navkar Japlo
(लय – भाव भीनी वंदना) शुद्ध मन नवकार जप लो, है सदा कल्याणकारी । डूबती मझधार नैया, पार कितनों की उतारी।।. ① एक आस्था हो ह्रदय में, एक स्वर हो एक लय में। पंच परमेष्ठी का स्मरण कर, जिन्दगी जिसने निखारी॥ ② मंत्रबल से नाग काला, काला, बन गई थी फूलमाला। नाचती थी मौत लेकिन, […]