Author name: Sunita Dugar

Bhikshu Swami

Ud Ud Re Man Dev Lok Me

 (लय- उड़ उड़ रे म्हारा काला रे कांगला) उड उड रे -३मन देवलोक में ,भिक्षु रा दरशण कर आवा-२ १.गाँव कंटालिये म अवतरियो ,ज्ञान सुधास्यू घटने भरियो सुधरी स्यू निज पथ न वरियो, उण पथ म्हे चलता जांवा भिक्षु रा दरशण कर आवा-२  ② आगम ने आधार बणायो शुद्ध साध रो रुप जणायो  तेरा पंथ […]

Gyanshala, Terapanth

Arham Arham Ki Vandana Fale (Gyanshala Geet)

अर्हम अर्हम की वंदना फले,अर्हम अर्हम की वंदना फले अर्हम की वंदना फले जीवन विकास हो, मन में सुवास हो, देखो दीपक से दीपक जले । विद्या के पावन मंदिर में सच्ची शिक्षा हम पाएं,  सदाचार के सुन्दर पथ पर कदम-कदम बढ़ते जाएं । चाहे रात या प्रभात हो भले ।। हम सारे हैं भाई-भाई

Gyanshala, Jain Bhajan

Naya Savera Aaya(bacho Ke Liye)

(तर्ज – लकड़ी की काठी) नया सवेरा  आया नई रोशनी लाया।  हीरे जैसा मानव जीवन पुण्योदय :से पाया ।। भेदभाव को भूलो, समता, रस में फूलों ।  परमात्मा को पानी है तो संतो के पद छूलो ।। झुक झुक-२ ऊँचा निज आचार हो प्रेम भरा व्यवहार  हो । . एक बनों और नेक बनों सबमे

Gyanshala, Terapanth

Bachcho Ho Jao Tum Ab Jaldi Se Taiyar

ज्ञान शाला लय- (सावन का महीना)  बच्चों हो जाओ तुम अब जल्दी से तैयार  चले ज्ञान शाला मिलजुल, हम बहे ज्ञान की धार  कितनी है प्यारी ज्ञान शाला हमारी  बनते है नन्हे मुन्ने यहाँ संस्कारी  अनुशासन सांचे में ढल पाए  नया निखार  बाल बोध पुस्तक सुन्दर नन्ही सी माला  मुख वस्त्र आसन चादर वेश है

Terapanth

Gyanshala Ke Liye

(लय-भकतामर) सुरतरु समान शीतल शासन ‌की छाया  सौभाग्य है हमारे यह  हमने पाया   आचार्य श्रृंख‌ला  ने सींचा है इसको  महाश्रमण जी ने इसको आगे बढ़ाया  शासन के गौरव मुनितारक सुहाते  सहयोगी सन्त पथ दर्शन है कराते ।  विश्न विनय मूर्ति है यशोधरा जी  संयोग साध्वियों का खुशिया मनाते  संस्कार संवरधंनी है, ज्ञान शाला  देती है

Guru, Terapanth

Sashanmata Pramukha Shree Ji

आरती जय जय शासन माता कृपा नजर पा तेरी, रू रूं खिल जाता। 1 संतों की धरती पर, जन्म हुआ तेरा । संतो की सेवा से जुड़ा रहा नाता। 2. निर्मलता निश्छलता, रग-रग में तेरे। परम तितिक्षा समता, घट घट की ज्ञाता।। 3. विनय विवेक देखकर, अहंकार झुकता। स्वाद कषाय विजेता, शिव सुख सन्धाता ।।

Adinath

Jay Jay Bolo Nabhi R Lal Ri

(लय- अलख जगावा) जय -2 जय बोलोनाभि र लालरी-2 कटज्या करम तमाम  आदीश्वर रोनाम प्यारोलागे है…..माला नाम नाम रटता सिद्ध हुव सब काम प्यारो लागे पुन्याई रो पूत्तलो, ज्ञान रो है दिवलो धर्म धूरी अवतार, प्यारो लागे हैआदीश्वर रोनाम वनिता दूलारों मरुदेवा प्यारो । स्वपन कियो, साकार पहला ही राजा,सिखाई रिवाजा, ब्राह्री सुन्दरीरोतात, प्यारो लागे

Terapanth

Shrawak Nishta Patra

श्रावक निष्ठा पत्र मैं जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का अनुयायी श्रावक हूँ / श्राविका हूँ। इसका मुझे गौरव है। में इसे जीवन-विकास का तथा समस्याओं के समाधान में सबसे बड़ा आलम्बन मानता हूँ / मानती हूँ। अतः अपने दायित्व निर्वाह तथा आस्था की पुष्टि के लिए मैं इन संकल्पों को स्वीकार करता हूँ। करती हूँ-

Paras

Tumse Lagi Lagan

श्री चिंतामणी पार्श्वनाथ भगवान की स्तुति तुम से लागी लग्न, ले लो अपनी शरण, पारस प्यारा। मेटो-2 जी संकट हमारा।। निश दिन तुमको जपूं पर से नेहा तंजू। जीवन सारा, तेरे चरणों में बीते हमारा।। मेटो-2 जी संकट हमारा।। अश्वसेन के राज दुलारे, वामा देवी के सुत प्राण प्यारे। सब से नेहा तोड़ा, जग से

Mata Pita, Vidayi

Sach Bat Poochati Hu Batao Na Babuji

दिल को छू लेने वाला गीत सच बात पूछती हु, बताओ न बाबु जी, छुपाओ न बाबु जी, क्या याद मेरी आती नही, पैदा हुई घर में मेरे, मातम सा छाया था,  पापा तेरे खुश थे, मुझे माँ ने बताया था,  ले ले के नाम प्यार, जताते भी मुझे थे,  आते थे कही से तो,

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