Author name: Sunita Dugar

Tapsya

Sawan Ka Mahina Aaya

(लय- सावन का महीना) सावन का महीना आया तपस्या चारो ओर आज देख तपस्वी जोड़ी को हम है भावविभोर ① तपस्या की भावना तो कभी-2 आती नई नई चीजे खाने जीभ ललचाती  खाने पर भी लगती थे काया कमजोर ॥  ② तपस्या की महिमा भारी कहते है सारे  रोग शोक मिटते पल में तप के […]

Tapsya

Dekhi Jo Tapsan Samne

(तर्ज – चुड़ी जो खनकी हाथ में) देखी जो तपसण सामने- 2 , याद तपस्या की आने लगी हाय धीरे-2 मेरे मन में -२ * मन करता है नौकारसी करु, मन करता है पौरसी करू देखु जो प्याली सामने, याद चाय की आने लगी,हाय धीरे-2 मेरे मन में -२ -मन करता है उपवास करु, मन

Tapasya

Tapasi O Tapasi Teri Seva Karu Mai

तपसी ओ तपसी तेरी सेवा करू मै-2 हर पल तेरे साथ रहू मै  सावन का महीना होगा जिसमे होंगे चौमासे  , जिसमें तपसी तू तप करसी – – तेरी अनुमोदन करू मैतेरी सेवा करू मै-2 हर पल तेरे साथ रहू मै   भादव का महीना होगा जिसमे होगे बादल , तपसी तू बादल तेरा नीर बनू

Tapsya

Tapasya Karo Aur Tapasya Karao

(लय-झिलमिल सितारों का ) तपस्या करो और तपस्या कराओं।  तपस्या देवी से लोगा मान बढ़ाओ । दुखा रो दावानल तप रै नीर स्यू बुझाओ’ 1 ①  भूंडी भूख भुवाजी दिन में तारा सा दिखावे।  जीदोरों उल्टियां होवे मन घबरावे ।  इसी काची काया रो क्यू लाड लडावो !! अभी राशि कोदर तपसी संता नै सुमरलयो

Tapsya

Tap Se Karm Hile

(लय- तुमसे लागी लगन) दिनेश मुनि  तप से कर्म हिले, तप से मोक्ष मिले जोअपनाए  तप की गंगा में नित्य नहाये भौतिक सुख के लिये तपन‌हीं करना  धन दौलत के लिये तपनहीं करना  आत्मा शुद्ध बने, आत्मा बुद्ध बने  लक्ष्य बनाएं तप की गंगा में नित्य-नहाये  तप के साथ स्वाध्याय चलेगा  जीवन मे अभिनव दीप

Tapsya

Tapsya Hai Uttam Mangal

(लय- शिविर है जीने का विज्ञान)  (धर्म की लौ जलाए हम) तपस्या है उत्तम मंगल, तपस्या है उत्तम मंगल।  बने चेतना दिन-२ तप्‌ की  ऊर्जा   से उज्जवल  * जैसे बहते पानी  के झरनो से भरे रे जलाशय  वैसे आश्रव के नालों से कर्म दलों का संचय  संवर और निर्जरा द्वारा हो निर्रझर निर्मल। * एहिक

Tapasya

Aaj Hamare Ghar Aangane Me Dekho(Tapsya)

(तर्ज-माईनी माई) आज हमारे मन आंगन में देखो खुशीयाँ छाई  सौ सौ साधुवाद उन्ही को तप में शक्ति जगाई भिक्षु शासन की बगिया में तप का फूल खिला है  बड़े भाग्य से ऐसा नन्दन वन् गण हमे मिला है  इस आंगन की-2 -ठंडी लहरें   चले पवन पुरवाई। सो सो साधुवाद — तप के पथ पर

Bana Bani

Kabhi Khusi Kabhi Gam

हँसी मज़ाक के गीत कभी खुशी कभी गम तर रम पम पम  अजी ऐसे गीत गया करो  कभी खुशी कभी गम तर रम पम पम  हँसो और हँसाया करो मेरी प्यारी सासु माँ मेरी अच्छी सासु मां  कभी नाश्ता बनाया करो  कभी नाश्ता कभी खाना,  कभी खाना कभी नाश्ता  कभी दोनों बनाया करो मेरी प्यारी

Bana Bani

Bani Ka Hai Bana Diwana

बन्ना बन्नी मज़ाक गीत बन्नी का है बन्ना दीवाना  हाय राम सखियों ने मारा ताना मैं बागों में जाऊँ, वो पीछे से आए  मैं कलियों को तोडूं, वो माला बनाए  लगता है कोई माली पुराना हाय राम मैं बाथरूम में जाऊँ, वो पीछे से आए  मैं साड़ी को धोऊँ, वो साबुन लगाए ज लगता है

Bana Bani

जुग जुग जिए हरियालाjug Jug Jiye Hariyala

(लय -जिसके हृदय में हरि स्वयं बंद है) जुग-2 जीए हरियाला बन्ना पीली पगड़िया वाला.  तेरा मुखडा है गौरा-गौरा-2. मुखड़े पर तिल है काला- जुग जुग जिए. हरियाला  तेरे माँथे पे चंदन का टीका-2 गले फूलो की सोहे माला बना पीली पगड़िया वाला बन्ना चला है घोड़ी चढ़के-2 बन्ने का भेष निराला  बन्ना पीली –

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