Vartman Ko Vardhman Ki Aavshykata Hai
वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता हर आत्मा दुखी है, सुख शांति खो चुकी है, परदृष्टि होके व्याकुल, महावीर पे रुकी है महावीर… महावीर…महावीर…महावीर… हिंसा पीडित विश्व राह महावीर की तकता है, वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है पापों के दलदल में फ़ंसकर धर्म सिसकता है, वर्तमान… हिंसा के बादल छायें संसार पर, सर्वनाश के दुनिया […]