Author name: Sunita Dugar

Mahavir Swami

Vartman Ko Vardhman Ki Aavshykata Hai

वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता हर आत्मा दुखी है, सुख शांति खो चुकी है, परदृष्टि होके व्याकुल, महावीर पे रुकी है महावीर… महावीर…महावीर…महावीर… हिंसा पीडित विश्व राह महावीर की तकता है, वर्तमान को वर्धमान की आवश्यकता है पापों के दलदल में फ़ंसकर धर्म सिसकता है, वर्तमान…  हिंसा के बादल छायें संसार पर, सर्वनाश के दुनिया […]

Mahavir Swami

Jay Jay Jagdishwar Mahavir

(लय- धर्म की लौ जलाए हम) जय जय जगदीश्वर महावीर -2 तीर्थकर बन गए तोड़ कर कर्मों की जंजीर  चंड सर्प को डंक लगाया प्रभु ने करुणा रस बरसाया,  हुई नकिञ्चित कमपित् काया, राग द्वैष की पड़ी न छाया   द्वेषकी समता और सहजता से बन गये शांत गम्भीर ② अनेकान्त मय अमृतवाणी अंकित उसकी अमिटकहानी 

Mahavir Swami

Arhata Ke Shikher Shree Mahavir Hai

(धुन : दिल के अरमां…) अर्हता के शिखर श्री महावीर हैं, शिखर को देखे, बने वह वीर है ॥ धन्य त्रिशला पारगत मातेश्वरी । खुले नृप सिद्धार्थ के तकदीर है ॥ चरम तीर्थंकर परम-पावन प्रभु । शान्ति समता के समंदर क्षीर है ॥ जगत के सब प्राणियों के मित्र हैं। त्याग तप करुणामयी तसवीर हैं

Mahavir Swami

Mahavir Charno Me Karte Naman

(लय -बहुत प्यार करते है तुमको सनम) महावीर-चरणों में करते नमन  देते हो नाथ! तुमही  सबको शरण 1 अंधकार में सूरज बन भू पर आए।  तपती दुपहरी में बन घन मंडराये ।  त्रिशला की गोद में था हुआ अवतरण ।। राजमहल तजकर संजम अपनाया।  भोगो से त्याग का पथ श्रेष्ठ बतलाया ।।  किया परम संपदा

Mahavir Swami

Vir Tera Nam Humko Jan Se Bhi Pyara Hai

(लय -एक तेरा नाम) वीर तेरा नाम-2 हमको जान से भी   प्यारा ।  तू है तो हर सहारा है वीरं तेरा नाम…. ① क्षत्रिय कुल का लाल-2 माता त्रिशला का दुलारा है  तू है तो हर सहारा है वीर तेरा नाम…. ② भव-भव में भटका हूँ कहीं चैन ना पाऊ मै तो हार गया। दुखियों

Mahavir Swami

Veer Aayenge

( लय- राम आयेगे) मेरी झोपड़ी के भाग के भाग, आज खुल जायगे  वीर आयेगे-2 वीरआयेगें वीर आयेंगे -2 – वीरआयेगेंतो अंगना सजाऊंगी, माणक मोती सै प्रभुकों मै बधाऊंगी  मेरे जन्मो कसारे पाप मिट जायेंगे, वीर आयंगे-2 मेरी झोपड़ी— मेरे वीर को में पालना झूलाऊगी,  माता त्रिशला  की लोरीमै सुनाऊंगी  मेरे रोम-2 में प्रभु बस

Mahavir Swami

Aatm Vijeta Shree Mahavir

अनुपम ज्योति किरण लायै, सबके मानस हर्षायें  (लय- नीले घोड़े रा असवार) आत्म विजेता श्री महावीर आये गहन तिमिर को चीर अनुपम ज्योति किरन लाये सबके मानस हर्षाए  क्षत्रिय कुंड ग्राम  के प्यारे ,क्षत्रिय कुल उजियारे  शांति विधायक बोधि प्रदायक जन -२ नयन सितारे  लाये अमृत मय संदेश, हरने रोष रागअरु दैष  अनुपम ज्योति किरन

Mahavir Swami

Sare Jag Me Jagayi Jyoti Gyan Ki

(लय- निर्बल से लड़ाई बलवान की), (दिया और तूफान ( सारे जग में ज्योति ज्ञानकी  ये कहानी है महावीर भगवान की चेत सुदी तेरस आई क्षत्रिय कुण्ड में खुशी छाई  वहाँ जन्म हुआ रे प्रभु वीर का  सिदार्थ  के दुलारे माता त्रिशला के प्यारे   वर्धमान धरा रे नाम वीरका  देव देव्या सज आये मेरू शिखर

Mahavir Swami

Veer Tera Sumiran Kari Mai Subah Sham

(तर्ज-श्याम तेरी वंशी (गीत गाता चल) वीर तेरा सुमिरन करू मै सुबह शाम    ऐसे ही काटू मै कर्मो के वाण त्रिशला के नन्दन को लाखो प्रणाम  झुक झुक कर  गाता रहूं में गुणगान भक्ति की राहो में बाधा न आए  कितने भी गम हो सभी भूलजाए  ऐसा ही वर दो है किरपा निधान  तुम

Mahavir Swami

Mahavir Ki Vani KO Ghar Ghar Pahuchana Hai

(तर्ज- संसार है इक नदियां)( रफ़्तार) महावीर  की वाणी को घर-2 पहुंचाना है  निर्वाण महोत्सव को, जो सफल बनाना है। बलिदान प्रधाओं से धरती भी थराई  अवतार लिया प्रभु ने सुख सरिता लहराई   सिखलाई लाई जीव दया, उसको न भुलाना है। जीयो और जीने दो सद‌भाव रहे  मन में  गिनती के सांस भरे इस माटी

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