Author name: Sunita Dugar

Beta, Beti, Mata Ji, Pita

Beti

घर की सब चहल पहल है बेटी ।  जीवन में खिला कमल है बेटी !! कभी फागुनी धूप सुहानी कभी चाँदशीतल है बैटी  शिक्षा गुण संस्कार रोप दो फिर बेटो सी सबल है बेटी, दो सहारा  गर विश्वासका तो पावन गंगाजल है बेटी प्रकृति के सद्‌गुण को सीचो तो निर्मल निश्चल है बेटी   क्यों डरते […]

Tulsi

Guru Tulsi Ke Avdano Ko Milkar Yad Karte Hai

* सौसो सुरज तप तपै चंदा उगै हजार।  इतना चानण होत भी गुरुबिन घोर अंधार ॥ गुरु, तुलसी के अवदानों को मिलकर याद करते है  तुम्हारी अर्चना में हम समर्पण भाव भरते हैं  हुआ घूंघट से माइक तक सफर संभव तेरे कारण  करो स्वीकार गुरूवर जी नमन शतबार करते हैं। ( लय-देखा एक ख्वाब) –

Adinath, Tapsya

Khushi Hum Aaj Manate Hai (Akshay Tritiya, Parna)

खुशी हम आज मनाते हैं (तर्ज :आज मेरे यार की शादी है)  खुशी हम आज मनाते हैं, आज मनाते हैं, मधुर संगीत सुनाते हैं ।। ध्रुव ।। स्वर्ण रवि आज उदित है – ओ हो,  कि जन-जन आज मुदित है – आ हा…  मधुर संगीत मुखर है,  प्रणत अक्षर-अक्षर है हो…  आदिश्वर के चरणों में

Mahavir

Vandana Mahavir Lo Abhivandana

(लय-दिल के अरमां) वंदना महावीर लो अभिवंदना,  भक्ति से पल-पल करें अर्थ्यथना ।। स्थायी ।। देव ! तुमने देन जग को दी नई,  रात में भी रोशनी सी हो गई।  जग उठी हर चेतना में स्पंदना ।।1।। शांति का संदेश पावन जब दिया,  शुद्ध कितने पापियों को है किया।  बोलती हर आतमा में साधना ।।2।।

Jain Bhajan

Bhor Bhor Uth Kar Prabhu Ne Sumirle

मंगल स्तुति (लय : बादळियो..) रचयिता : साध्वी जतनकुमारीजी भोर-भोर उठ कर प्रभू भोर-भोर उठ ‘कर प्रभू नै सुमरलै भव-जल तूं तर ज्यावैला ओ , मनवा ।  प्रभू नाम च्यांनणिये स्यूं आंगणियै नै भरलै,  अंधियारो मिट ज्यावैला, ओ मनवा ।। १. ऋषभ, अजित, संभव, अभिनन्दन है,  सुमति, पद्म, सुपार्श्व जग वंदन बंधनहै  सब कट ज्यावैला,

Jain Bhajan, Paryushan

Atma Ki Pothi Padhne Ka Yah Sunder Avasar Aaya Hai

पर्युषण गीत सान्निध्य-समणी निर्देशिका डॉ निर्वाणप्रज्ञा आत्मा की पोथी पढ़ने का यह सुंदर अवसर आया है । सोपान यही है चढने का मस्तिष्क मनुज का पाया है। संवत्सर का संदेश सुने निर्मल मन निर्मल काया है। 1. जीवन की पोथी के पहले, पन्ने में मैत्री मंत्र लिखो सिर दर्द समूल मिटाने का यह सुंदर अवसर

Bhikshu Swami

Bhikshu Tera Nam Taran Hara

(लय- कोरा कागज था ये मन मेरा) भिक्षु तेरा नाम तारनहारा तेरे चरणों में ये जग ,सारा-2 दीप दुलारे प्यारे संघ सितारे ।  निश दिन रहते हो, साथ हमारे। बलिहारी मै जाऊ पाऊं दरश तुम्हारा भिक्षु तेरा नाम तारनहारा तेरे चरणों में ये जग ,सारा- ② बलिदानों की अमर कहानी  कष्टों में भी अलख जगाई

Bhikshu Swami

Swamiji Jhanan Jhanan Si Jhan Jhanat Si Ru Ru Lage Re

स्वामीजी । झणण, झणण, झण, झण झणाट सी रूं रुं लागे रे,  सिरियारी समाधि पर कोई सगती जागे रे ।। स्थायी ।। सुई पाग में टांगतो, बोल्यो दरजी हुसियार।  अबतो देरी बाबाजी री, म्हारो काम सो त्यार ।।1।। स्यामीजी पद्मासन पर विराज लीन्हो, काउसग मुद्रा ध्यान।  आपां रै अब कैरी देरी ? कहतां छोड्या प्राण।।2।।

Mahapragya

Mahapragya Matiman Hai

(लय- आज मंगलवार है) महाप्रज्ञ मतिमान हैं, जिन शासन की शान हैं।  विश्व संत के चरणों में नत मस्तक सकल जहान हैं ।। टेक ॥ छोटे से टमकोर ग्राम में कोहिनूर को जन्म मिला। तोलाराम तात वर माता बालूजी का भाग्य खिला।  योगी का फरमान है, बालक पुण्य निधान हैं||1|| तीन महीने के न हुए

Mahavir

Ghunghru Chham Chama Cham

 घुंघरू छम छमा छम छण णा ण ण बाजे रे। हिवड़े रे मंदिर में प्रभु महावीर विराजै है।। स्थायी।। कुण्डलपुर में जन्म्या भगवन, घर-घर मंगलाचार।  देव – देवियां मंगल गावै, प्रभु लियो अवतार।।१।। संयम रे मारग पर चाल्या, कष्ट सह्या अनपार।  वर्धमान स्यूं वीर बण्या प्रभु, मन में समताधार ।12।। अन्तर्यामी समदर्शी बण, पायो केवल

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