Tapsya

Tapsya

Tap Se Karm Hile

(लय- तुमसे लागी लगन) दिनेश मुनि  तप से कर्म हिले, तप से मोक्ष मिले जोअपनाए  तप की गंगा में नित्य नहाये भौतिक सुख के लिये तपन‌हीं करना  धन दौलत के लिये तपनहीं करना  आत्मा शुद्ध बने, आत्मा बुद्ध बने  लक्ष्य बनाएं तप की गंगा में नित्य-नहाये  तप के साथ स्वाध्याय चलेगा  जीवन मे अभिनव दीप […]

Tapsya

Tapsya Hai Uttam Mangal

(लय- शिविर है जीने का विज्ञान)  (धर्म की लौ जलाए हम) तपस्या है उत्तम मंगल, तपस्या है उत्तम मंगल।  बने चेतना दिन-२ तप्‌ की  ऊर्जा   से उज्जवल  * जैसे बहते पानी  के झरनो से भरे रे जलाशय  वैसे आश्रव के नालों से कर्म दलों का संचय  संवर और निर्जरा द्वारा हो निर्रझर निर्मल। * एहिक

Adinath, Tapsya

Khushi Hum Aaj Manate Hai (Akshay Tritiya, Parna)

खुशी हम आज मनाते हैं (तर्ज :आज मेरे यार की शादी है)  खुशी हम आज मनाते हैं, आज मनाते हैं, मधुर संगीत सुनाते हैं ।। ध्रुव ।। स्वर्ण रवि आज उदित है – ओ हो,  कि जन-जन आज मुदित है – आ हा…  मधुर संगीत मुखर है,  प्रणत अक्षर-अक्षर है हो…  आदिश्वर के चरणों में

Tapsya

Mhare Hivade Me Harsh Vibhor (Tapsya Geet)

म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर (तर्ज – म्हारा हिवडा में नाचे मोर…) म्हारा हिवडा में हर्ष हिलोर, शुभ अवसर आया  हम आकर भाव विभोर, तपस्वी गुण गावा  पुलकित तन मन, खुशी का सरगम,  खिल गई जीवन बगियाँ ये तप तो कितना पावन है, जैसे महके घी – चंदन है  एसी खुशबुसे, ऐसी भक्तिसे, महका तपस्वी

Tapsya

Karke Tapsya Tan Ko Tapaya

(कितना बदल गया इन्सान) कर के तपस्या, तन को तपाया, आप हैं बड़े महान,  करें हम सब मिलकर सम्मान,  करें हम सब मिलकर बहुमान । (२) । ① अरे सोना जब है आग में तपता तभी तो वो है कुन्दन बनता। संस्कार गर अच्छा मिलता,  तभी तो सच्चा मार्ग है दिखता।  धर्म की जड़ तो

Bhachya, Tapsya

Anumodna Anumodna

(लय- आ चल के तुझे मैं दिखलाऊं) अनुमोदना, अनुमोदना अनुमोदना बारम्बार।  तपस्या को है, तपसी को है। वंदन है बारम्बार । विषयों से भरा, संसार पूरा आसान नही है यहां।  मन वश मे रहे, कुछ भी न कहे, दुष्कर है ये काम बङा ।।1।। तप जीत गया, मन हार गया। संयम का ये सत्कार। आसान

Bhachya, Tapsya

Guru Vanan Ghani Khhad ( Bhanchya)

गुरु वानणरी गुरू.  वानणरी.   घणी रे.     खाड़, म्हें.  तो     शहर.   सतरंज  में जायस्यांजी,  माता मोरादेवी रा नन्द, म्हें तो आदिनाथ स्वामी न बांधस्याजी.  पोलीड़ा रे पोल उगाड़, म्हें तो घणा रे उमाय आयीयाजी. आंवतंड़ा घणा बूठा छ मेंव, हरिया लोए सावनओलरोजी, ओलरियां घणा बरसा छ मेंव,म्हारै मोतीड़ालड़लांगीयाजी  ॥१॥ गुरु बानणरी घणी रे खाड़,

Bhachya, Tapsya

Motya Ra Lamak Jhumka (Bhanchya)

मोत्यांरा लामक-झुमका मोत्यां रा ए लामक- झुमका, मखतुल्यांरी बनरवाल सुखी ए आज दिन रलियामणा। बंधाओ मोरां देजी, रे ओबरै, जिण जाया छै आदिनाथ देव, सुखी ए, आज दिन रलियामणा। आदिनाथ स्वामी रो जन्म भलो हुयो, म्हारे आद हलावण देव सुखी ए, आज दिन रलियामणा।।१।। मोत्यां रा ए लामक – झुमका, मखतुल्यांरी बनरवाल सुखी ए आज

Bhachya, Tapsya

Mhare Bala Ri Byawan Jyot , (Bhanchya)

म्हारे बाला री ब्याहण ज्योत म्हारे बाला री ब्याहण जोत, प्रभात्यो तारो उगियो। तारो उग्यो मोरादेजी री कुख, जटै आदिनाथ स्वामी जन्मिया,  आदिनाथ स्वामी मोटा छै देव, म्हारे आद हलावण देवता जी।।१।। म्हारा बाला री व्याहण जोत, प्रभात्यो तारो उगियो। तारो उग्यो अचिरादेजी री कूख, जठै शांतिनाथ स्वामी जन्मिया, शांतिनाथ स्वामी मोटा छे देव, म्हारे

Bhachya, Tapsya

Diwalo (Bhanchya)

दींवलो पाछलडै पहर री जी रात, घर जोई ए लक्ष्मी दीवलो जी। दीवलो म्हारो एड्यां-मेड्यां टांग जठै आदिनाथ जन्मिया जी। आदिनाथ स्वामी मोटा छै देव, म्हारे आद हलाईया जी ।।१।। पाछलडै पहररीजी रात, घर जोई ए लक्ष्मी दीवलो जी। दीवलो म्हारो एड्यां-मेड्यां टांग जटै शान्तिनाथ जन्मियाजी। शांतिनाथ स्वामी मोटा छै देव, म्हारै रोग मिटाईयाजी। शांतिनाथ

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