Adhyatmik

Adhyatmik, Nirgun, Satsang

Chhodo Kyu Koni Krodh Ro Nasho

छोडो क्यूं कोनी।   (तर्ज : मन्दिर में कोई ढूंढ़ती फिरै…) छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध रो नशो ? थांरी आंख्यां में लोही रो ऊफाण । छोड़ो क्यूं कोनी क्रोध से नशो ?  थांरी अक-बक बकणै री पड़गी बाण ।  दूजां नै कालै नाग ज्यूं डसो ।। क्रोध बड़ो दुर्गुण दुनिया में, घट-घट में बसनारो ।  जिण […]

Adhyatmik, Mangal Bhavna

Sabka Mangal Hoy Re

सबका मंगल होय रे तेरा मंगल, मेरा मंगल सबका मंगल होय रे सबका  मंगल सबका मंगल सबका मंगल होयरे  जिस जननी ने जन्म दिया है उसका मंगल होयरे  जिस गुरु ने ज्ञान दिया है उसका मंगल होयरे   जिस पिताने पाला पोसा उसका मंगल होय रे  इस जगत के सब दुखियारे प्राणी का मंगल होय रे 

Adhyatmik, Jain Bhajan

Ki Man Ko Shant Banaye Hum

सांस सांस पर परमात्मा का ध्यान लगाये हम  किमन को शान्त बनाये हम 1 जीवन है संग्राम से जीना सीखे हम  अमृत व विष दोनो को पीना सीखे हम  लाभ अलाभ हर्ष, शोक में सम् बन जाए हम  कि मनको मन को शान्त बनाये हम  2. वर्तमान में जीने का अभ्यास बढ़ाते जाये  भूतकाल के

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Satsangat Se Sukh Milta Hai

सतसंगत से सुखमिलता है  जीवन का कण-2 खिलता है। सत्संगत से सद्‌ज्ञान मिले  सत्‌संगत से भगवान मिले पानी से पौधा फलता‌ है ② सतसंगत से वैराग्य बढ़े  सतसंगत से सौभाग्य बढ़े  दीपक से दीपक  जलता है ③ नास्तिक भी आस्तिकता पाता  पापी भी पावन बन जाता  चाबी से ताला खुलता है। मानव को  जैसा संग

Adhyatmik, Kabir, Nirgun, Satsang, Vairagya

Maya Ke O Pujari Aage Ki Kuch Khabar Hai

माया के ओ पुजारी आगे की कुछ खबर है।  इस घर से और आगे एक दूसरा भी घर हैं। ① इतना ना जुलम करतू धरती भी काँप जाए।  वरना दुखी की आहे तेरा निशां मिटाये  अब भी जरा संभल तू डर मौत का अगर है। 2) जो पाप कर चुके हैं और अब भी कर

Adhyatmik, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Bada Dukh Paya Re Tujhko Bisar Ke

(लय- छुप गया कोईरै) बड़ा दुख पाया रे तुझको बिसार के  रंग अनोखे देखें, इस संसार के भूले उपदेश तेरा ये, जगवासी,  चोला अनमोला खोये बनकर विलासी  कर्मों की वीणा बाजे पापों के तार से ।। भटके पथिक अब हुए हैं. दीवाने गकर्म की गति को कोई नहीं पहिचाने    प्यासे है सब तेरी अमृत सी

Adhyatmik, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Meettho Meettho Bol Tharo Kai Bigade

(तर्ज-धीरे-2 बोल कोई सुन ना ले) मीठो-२  बोल थारो काई बिगड़े ,काई बिगडै़ थारो काई बिगडै़-३  इस दुनियां में गम नहीं ,कब निकले प्राण मालुम नहीं   सोच समझ लेना तु ये संसार  खाली झोली मत भरना तु यार  तु जान ले पहचान ले, संसार किसी का घरनहीं कब निकले प्राण मालूम नही भूल गया  क्यों

Adhyatmik, Nirgun Bhajan, Satsang, Vairagya

Is Madhur Jingani Ka Bharosa Nahi

( तर्ज – तुम अगर साथ देने का वादा करो) इस मधुर जिन्द‌गानी का भरोसा नहीं । कोन जाने ये पंछीकब उड़‌ जायेगा  तेरा वश न चलेगा कोई भी वंहा काल जब सिर पे आकर के मंडरायेगा ये मानव का भव् है बड़ा कीमतीपुण्य काहोउदय  तब कहीं ये मिले गर विषय‌वासनाओं में डूबे रहे पाप

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Jo Bhi Mila Khajana Use Bant Jana Re

मिला खजाना (तर्ज : नानी तेरी मोरनी को मोर ले गया……….) जो भी मिला खजाना उसको बांट जाना रे। क्या जाने कब होगा इस धरा पर आना रे । । ध्रुव ॥ बहुत कमाया बहुत ही खाया काफी मौज उड़ाई। श्रम से कोड़ी कोड़ी जोड़ी पूंजी खूब बढ़ाई। मिट्टी के सब खेल खिलौने मत फस

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Durlabh Manav Jeevan

दुर्लभ मानव जीवन (लय : ऐ मेरे दिले नादान……..) दुर्लभ मानव जीवन तेरे हाथ मे आया है,  इस क्षण भंगुर जग में, मन क्यों ललचाया है। दुर्लभ……. ॥ ध्रुव ॥ यह तन तो मिट्टी का, एक बना खिलौना है,  इस नश्वर तन को तो, इतना क्या धोना है,  जिसने छोडी ममता उसने सुख पाया है।

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