Author name: Sunita Dugar

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Parv Hariday Me Ullas Bhar Raha

पर्व पर्युषण हृदय उल्लास भर रहा। जागरण का जागरण का, अनवरत आह्वान कर रहा। २. जन्म मृत्यु अनन्त अब तक हो गए चेतन । और होते ही रहेंगे, ज्ञान कर चेतन ! मोह का मोह का, है उदय जिससे चक्र चल रहा ॥ २. कर्म फल भुगतान करते अन्त कुछ आया। उच्च कुल में पुण्य […]

Jain Bhajan, Paryushan

Paryushan Yah Parv Mahan,

(तर्ज : मेहंदी रची थारै) पर्युषण यह पर्व महान्, करते हम दिल से सम्मान।  छाई अजब बहार हो, हर घर घर में। १. चौरासी के चक्कर में, हम सबने जन्म किए कितने ।  जन्म मरण की परम्परा में, सहन वेदना की हमने।  अब तो मिला किनारा है, श्री जिन धर्म सहारा है।  जीवन की पतवार

Mahavir Bhajan

Teri Sharan MileM

(तर्ज : तुमसे लागी लगन) तेरी शरण मिले, भव संताप टले, त्रिशलानन्दन ! तेरे चरणों में शत शत वन्दन ॥ १. खुशियां लेकर तुम महलों में आए। छाई रौनक, जन हरसाए। बरसा कण कण अमन, विकसित जन जन मन ॥ त्रिशला… २. चन्दनबाला को तुमने है तारा। अर्जुनमाली का भार उतारा। जिसने ले ली शरण,

Mahapragy Bhajan

Mahapragy Guruvar Jivan Ka Sringar Hai

(तर्ज : खड़ी नीम के नीचे) महाप्रज्ञ गुरुवर जीवन श्रृंगार है। आज समर्पित श्री चरणो में भक्ति भरा उपहार है। १. जन्मोत्सव की मंगल घड़ियां खुशियां छाई कण कण में। दशों दिशाएं पुलकित आई नई चेतना जन जन में। श्रद्धा से श्रद्धा से, झंकृत वीणा के तार हैं ॥ २. एक-एक पर गुरुवर ने वात्सल्य

Jain Bhajan, Terapanth

Mahima Shasan Ri

(तर्ज: धरती धोरां री) महिमा शासण री… भैक्षव गण री गरिमा भारी।  जागी भाग्य दशा आपांरी।  फूली फूलां स्यूं फुलवारी ॥ १. तुलसी उपवन नै जीणै रो विज्ञान सरसायो।  सिखायो । पार समन्दर जश फहरायो ॥ २. जो भी मर्यादा में चालै।  गुरुवर हाथ पकड़ कर झाले।  पग पग सारा संकट टालै ॥ ३. विनयी

Acharya Tulasi

Jhumar Kul Ke Bhal

झूमर कुल के भाल(तर्ज : ना कजरे की धार) मां वदनां के लाल, श्री झूमर कुल के भाल । ले कर में शांति मशाल, तुमने ज्योति जलाई है। गुरुवर राह दिखाई है। १. गरिमामय तेरा जीवन, है जिसकी अकथ कहानी । अभियान तुम्हारे नूतन, कण कण में अमिट निशानी । करे भक्ति, मिले शक्ति, हो

Gajanan, Ganesh Ji, Ganpati

Gouri Nandan Tharo Abhinandan

( लय- तुम्हारा प्यार मिला है) गौरीनन्दन थारो अभिनन्दन करे सारो परिवार-२ गजानन आन पधारो लडावा लाड म्है थारों -४ बल और बुद्धि को तो पूरो थारो भंडार है  तीनो लोका में पहलो थारो अधिकार है  थारी पूजा सबसे पहले करे सारो संसार गजानन आन पधारो—- विघ्न विनाशक सारी विपदा मिटाओ  रिद्धि सिद्धि साग लेकर

Acharya Tulasi

Tulasi Tumko Karte Hai Har Pal Naman

तुलसी तुमको करते हैं  (तर्ज : बहुत प्यार करते) तुलसी ! तुमको करते हैं हर पल नमन। हमें शक्ति दे दो, मिलेगा अमन ॥ १. तुम्हारी नजर में, जिन्दगी हमारी। हमारे सफर में, दिशाएं तुम्हारी। बढ़ेंगे सदा हम, दिल की लगन ॥ २. तुम्हारी शरण है, हमारा सहारा। जग को मिलेगा, तुम्हीं से उजारा। प्रेम

Bhikshu Swami

Bhikshu Teri Rah Par Hum,

,(तर्ज दिल के अरमां) भिक्षु तेरी राह पर हम चल रहे। नाम तेरा हम हमेशा जप रहे ॥ १. जिन्दगी आदर्श की तुम जी गए। कष्ट में भी मुस्कुराते तुम रहे ॥ २. वीर वाणी पर समर्पित तुम सदा ले अटल विश्वास तुम बढ़ते रहे ॥ ३. तुम चले जिस ओर मंजिल वह बनी। गीत

Bhikshu Swami

Bhikshu Ko Dil Me Basate Chalo,

(तर्ज : ज्योत से ज्योत) भिक्षु को दिल में बसाते चलो,  श्रद्धा का दीपक जलाते चलो।  दिल की दीवारों पै उनको बिठा,  जीवन के संकट मिटाते चलो ॥ 7. दीपां मां के लाल दुलारे,  बल्तु सुत उजियारे ।  कंटालिय में जन्म लिया था,  खिल गए भाग्य हमारे।  राहों की उलझन मिटाते चलो ॥ २. कैसा

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