Adhyatmik

Adhyatmik, Kabir, Nirgun Bhajan, Satsang

Niklenge Ik Din To Tan Se Ye Pran

मंजिल (लय : एक दिन बिक जायेगा माटी के मोल) निकलेगे इक दिन तो, तन से ये प्राणपीछे रह जायेगे मिट्टी के मकान  मोटर विमान ट्रेन आयेगे ना काम परिजन ले जायेगे अर्थी को श्मशान ॥ मनमानी नादानी चाहे कर ले जीवन के धट को विष से चाहे भर ले ये साथी ये भाई, ये […]

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Kya Lekar Tu Aaya Jagat Me

क्या लेकर तू आया जगत में लय :- चाँदी की दीवार न तोड़ी क्या लेकर तू आया जगत में, क्या लेकर तू जायेगा।  सोच समझ ले रे बन्दे, नहीं आखिर तू पछतायेगा ॥ स्थायी ॥ बचपन बीता इन गलियों में यौवन भी रंग रलियों में।  खूब सजाया तूने तन को, फूलों और कभी कलियों से

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Re Panchhi Is Pinjre Ka Tu

पिंजरा (लय : तैरापंथ महान रे) रे पंछी इस पिंजरे का तू क्या करता अभिमान रे आखिर पिंजरा पिंजरा ही है, तु है बन्दीवान रे। कुदरत ने मिट्टी का तेरा प्यारा पिंजरा बना दिया,  खुब सजाया बाहर से, और रंग सुनहरा चढ़ा दिया, पर अन्दर से कैसा है यह सोच जरा इन्सान रे। आज पुष्ट

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Milyo Minakh Avatar

मिल्यो मिनख अवतार (भजन) लय : खड़ी नीम रै नीचे मिल्यो मिनख अवतार, चेत तूं बावला। चौरासी स्यूं निकल बारणै, डग भर जरा उतावला ॥ स्थायी ॥ मोह माया में मुग्ध बण्यो, तूं काल अनन्तो बीतग्यो, भर्यो खजानो आज देखले, तर तर सारो रीतग्यो, रीतै रा कुण करसी जग में चावला ॥१ ॥ डगर अजाणी

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Mhe To Bachapan Ri Bata Ne Yad Kara

मैं तो बचपन री बातां (लय : मैं तो बाबुल रे बागा री चीड़कली) मैं तो बचपन री बातां न याद करुं हँसतो खिलतो बितायो हो बो काल … बुढ़ापो बैरी आय गयो। ॥ स्थायी ॥ ज्ञाती लोगां रो पायो हो प्रेम घणो  अब बिगड़ी है सगलां री चाल … बुढ़ापो बैरी आय गयो। म्हारा

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Yadi Bhala Kisi Ka Kar N Sako To

यदि भला किसी का (लय : दिल लुटने वाले……..) यदि भला किसी का करन सको तो, बुरा किसी का मत करना  यदि सदगुण मोती चुग न सको तो, दुर्गुण से घर मत भरना (ध्रुव) यदि सच्ची साक्षी दे न सकौ तो झुठ गवाही मत देना  यदि नीति से धन पा न सको तो घुंस किसी

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Mandir Masjid Girja Ghar Me

मन्दिर मस्जिद गिरजाघर (लय : खड़ी नीम के नीचे) मन्दिर मस्जिद गिरजाघर में बांट दिया भगवान को,  धरती बांटी, सागर बांटे, मत बांटो इन्सान को ॥ ध्रुव ॥ अभी यह राह तो शुरू हुई है लेकिन मन्जिल दूर है, उजियाला महलों में बंदी, हर दीपक मजबूर है। मिला न सूरज का संदेशा, मत रोको प्रस्थान

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Ke Kare Bharoso Kal Ro

• के करै भरोसो काल रो (लय : आ बाबासा री लाड़ली…….) के करै भरोसो काल रो अणचिन्त्यो आवैला,  ओ माटी रो महल एक पल में ढह ज्यावैला। बड़ा-बड़ा मनसूबा बांधै ऊंची भरै उड़ान रे,  अपणी मो में बण्यो बावलो भूल गयो भगवान रे  सूरज से जीवन ने ओ राहू गह ज्यावैला । समै-समै पर

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Samay O Beet Jyavelo

• समय ओ बीत ज्यावैलो (लय : धर्म की लौ जलायें…) समय ओ बीत ज्यावैलो । जाग, फिर ओ अवसर थारै, हाथ न आवैलो ॥ १. फूल झूलतो टहणी स्यूं, झटकै नीचे गिर ज्यावै,  हर्या-भर्या रूंखां रा पल में, पान-पता खिर ज्यावै।  बिजली रो आखिर झबकारो, ओ छुप ज्यावैलो ॥ २. थांरी म्हांरी में ओ

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Karmo Ki Chal Nirali Hai

चाल कर्म की (लय : यदि भला किसी का कर न सको तो) कर्मों की चाल निराली है, ये बात सभी ने मानी है ना जाने कब ये जाय बदल, इसकी गति तो अनजानी है जबसे सृष्टि का रुप बना, जीवन-मृत्यु का दौर चला, तबसे कर्मों का ये चक्कर, जग के जीवो के साथ चला

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